Dussehra Kyu Manaya Jata Hai – Vijay Dashmi Kab Hai ?

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Dussehra Kyu Manaya Jata Hai - Vijay Dashmi Kab Hai ?
Dussehra Kyu Manaya Jata Hai - Vijay Dashmi Kab Hai ?

दोस्तों हम सभी को अपने धर्म शास्त्र यानी माइथोलॉजी के बारे में जानना बहुत पसंद होता हैं और हिन्दू मायथोलॉजी का क्या कहना इसकी तो बात ही अलग हैं यहाँ आप को कहानियों का भण्डार मिलेगा चाहे जन्माष्टमी हो या फिर नवरात्रि सारे त्यौहारों मनाये जाने के कई सारे कारण होते हैं जो इन त्योहारों के महत्व को कई ज्यादा बढ़ा देते हैं हमारे इन्ही रंग बिरंगी माइथोलॉजी के पिटारे से हम एक नया टॉपिक लेकर आये हैं Dussehra ?

विजय दशमी का नाम तो आप सबने सुना होगा विजय दशमी के दिन को हम सब दशहरा के रूप में मनाते हैं ये नवरात्रि का अंतिम दिन हैं इस दिन माँ दुर्गा ने सबसे शक्तिशाली असुर महिषासुर का वध किया था Dussehra यानि विजय दशमी के दिन को लोग माँ दुर्गा को अंतिम विदाई देते हैं व उनकी प्रतिमा को बड़े ही जोरों शोरो से विसर्जित करते हैं।

माँ को विदाई देने के साथ साथ लोग अगले साल माँ दुर्गा के लौट कर आने की प्राथना करते हैं चलिए विजय दशमी के बारे में और विस्तार में जानते है।

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Dussehra – Vijay Dashmi क्या है ?

विजय दशमी हिंदुओं द्वारा मनाए जाने वाला एक त्योहार है भगवती के विजय के नाम पर इस दिन का नाम विजय दशमी पड़ा इस दिन भगवान राम जी ने चौदह वर्ष का वनवास खत्म कर रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे इसलिए भी इस दिन को विजय दशमी कहा जाता हैं एक और महत्वपूर्ण कारण हैं।

जिसके वजह से इस दिन को विजय दशमी और Dussehra के नाम से पुकारा जाता हैं बहुत से लोग ये मानते हैं कि अश्विन शुक्ल दशमी को तारा निकलने के बाद के समय को ” विजय ” काल कहते हैं इस काल मे किया गया कोई भी कार्य सफल अवश्य होता हैं।

विजय दशमी नवरात्रि के अंतिम दिन अर्थात दशमी के दिन मनाया जाता है बहुत से लोग इस दिन को दशहरा के नाम से भी पुकारते हैं इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत और असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाई जाती है विजय दशमी के दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के शक्तिशाली असुर का वध करके पूरे सृष्टि को उसके अत्याचारों से मुक्त किया था।

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विजय दशमी में किये जाने वाले कार्यक्रम ?

विजय दशमी का नाम सुनते ही बहुत से लोग यही कहते हैं कि इस दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा स्वरूप का विसर्जन होता हैं पर सिर्फ इतना कहना गलत होगा क्योंकि नौ दिनों तक माँ दुर्गा की पूजा और पाठ करके दसवे दिन लोग माँ को बड़े ही धूम धाम से हर्ष उल्लास के साथ विदा करते हैं।

इस दिन वातावरण कुछ अलग ही दिखाई देता हैं एक तरफ माँ को बड़े ही खुशी व आनन्द से विदा करते हैं तो दूसरे तरफ उनके जाने से दुःखी भी होते है जैसा कि आप सब जानते हैं कोलकाता में दुर्गा पूजा बड़े धूम धाम से मनाया जाता हैं इस दिन कोलकाता में शादी शुदा औरते सिंदूर से होली खेलती हैं जिसे सिंदूर खेला के नाम से जाना जाता हैं।

इतना ही नहीं बहुत से जगहों पर इस दिन को और भी धूम धाम से मनाया जाता हैं इस दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था इसलिए बहुत से लोग दशहरा के दिन हर साल रावण का एक बड़ा सा स्वरूप बनाते हैं और फिर कोई व्यक्ति राम जी के तरह उस स्वरूप में तीर मार कर आग लगा देता हैं रावण जलाने के इस काम को लोग रावण दहन के नाम से पुकारते है।

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विजय दशमी क्यों मनाई जाती है ?

विजय दशमी मनाने का सबसे बड़ा कारण केवल एक ही हैं इस दिन बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी सत्य ने असत्य को बुरी तरह हराया था ऐसा भी माना जाता हैं कि इस दिन सारी बुराई खत्म हो जाती हैं लोग कहते हैं कि Dussehra के दिन माँ दुर्गा अपने साथ सारे बुराई को लेकर चली जाती हैं और रावण दहन के साथ साथ बुराई दोष जल कर नष्ट हो जाता हैं।

 विजय दशमी मनाने के पीछे कई ऐतहासिक कारण भी हैं जिनमे से कुछ हम आप को नीचे बताने वाले हैं  

महिषासुर का वध :

ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त कर जब महिषासुर चारों तरफ हाहाकार मचा रहे थे धरती हो या देव लोक सभी जगह पर लोग उनके आतंक से भयभीत थे तब त्रिदेव सहित सभी देवों ने माँ दुर्गा की रचना की क्योंकि महिषासुर को ये वरदान प्राप्त था कि कोई भी देव उन्हें नही मार सकते यहाँ तक की त्रिदेव भी नहीं माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्घ नौ दिनों तक चला और दसवे दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध कर दिया इसीलिए इस दिन को बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मनाते हैं।

रावण का वध :

रावण जो एक अत्यंत बुद्धिमान प्रकांड पंडित था वो भी अपने अहंकार के कारण काल के गाल में समा गए रावण ने अहंकार में आकर माता सीता का हरण किया था चौदह वर्ष के वनवास के बाद नवरात्रि के दिनों में ही राम और रावण के बीच द्वंद्व युद्ध होता हैं जिसमे राम जी नवरात्रि की पूजा कर माँ दुर्गा को प्रसन्न कर रावण को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र प्राप्त करते हैं और दसवे दिन उस ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर रावण का वध करते हैं अतः इस दिन को बुराई पर अच्छाई के जीत के रूप में मनाते हैं।

विराट का युद्ध :

महाभारत के समय जब कौरवों ने छल से पांडवो को हराकर उन्हें बारह वर्ष का अज्ञातवास दिया था तब पांडवों ने राजा विराट के राज्य मतस्य प्रदेश में आशरा लिया था बारह वर्ष के अंतिम दिन जब अज्ञातवास खत्म हो रहा था तब कौरवों ने मत्स्य प्रदेश पर आक्रमण कर दिया था उस समय अर्जुन ने अकेले अपने गाँधीर से शत्रुओं म साथ कड़ा मुकाबला किया और उन्हें धूल चटाई वो दिन भी विजय दशमी का ही दिन था।

इसीलिए ऐसा माना जाता हैं कि बुराई कितनी भी बड़ी या शक्तिशाली क्यों न हो अच्छाई के सामने हार ही जाती हैं यही कारण हैं कि इस दिन को विजय के नाम से पुकारते है इस दिन अच्छाई और सत्य की हमेशा जीत होती हैं।

दोस्तों मुझे आशा हैं कि आप को यह आर्टिकल पसन्द आया होगा इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप Dussehra & विजय दशमी के महत्व को और अच्छी तरह जान गए होंगे अकेले ज्ञान रखने से अच्छा है आप सबके साथ इस ज्ञान को शेयर कीजिये धन्यवाद।

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